पूजा व सेवा
ऑनलाइन केवल स्थान सुरक्षित होता है। दक्षिणा मंदिर के काउंटर पर ही दी जाती है, इस वेबसाइट पर कोई भुगतान नहीं लिया जाता।
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दर्शन एवं दंड का आशीर्वाद
बाबा के रजत मुख के दर्शन के बाद पुजारी मोरपंख के गुच्छे, यानी कोतवाल के दंड, से श्रद्धालु को थाप देते हैं। मान्यता है कि इससे रोग, भय और नज़र दूर होती है।
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रक्षा सूत्र (काला धागा)
काला धागा, जिसे गंडा या भैरव रक्षा सूत्र कहते हैं, मंदिर में अभिमंत्रित कराकर रक्षा के लिए कलाई या गले में पहना जाता है। श्रद्धालु इसे बच्चों और परिवार के लिए घर भी ले जाते हैं।
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तेल एवं दीप अर्पण
बाबा को सरसों या तिल का तेल चढ़ाया जाता है और सरसों के तेल का दीपक जलाया जाता है, प्रायः काले तिल और फूलों के साथ। यह अर्पण विशेष रूप से रविवार, मंगलवार और भैरव अष्टमी को किया जाता है।
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पुष्प, माला एवं भोग अर्पण
फूल, नीले फूलों की माला, उड़द के बड़े, मिठाई और पान पुजारियों के माध्यम से चढ़ाए जाते हैं। जो श्रद्धालु इस परंपरा को मानते हैं वे मदिरा भी चढ़ाते हैं; यह ऐच्छिक है।
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नित्य आरती
पुजारी नित्य पूजा का क्रम निभाते हैं, जिसमें भोर से पहले मंगला आरती, दोपहर में भोग आरती और शाम को संध्या आरती होती है। आरती ढोल, घंटे और डमरू की ध्वनि के साथ होती है।
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वार्षिक श्रृंगार एवं अन्नकूट
वर्ष में एक बार वार्षिक श्रृंगार पर बाबा को नए वस्त्र धारण कराए जाते हैं और फल-मिठाई सहित छप्पन प्रकार का भोग लगाया जाता है, जिसके बाद विशेष आरती होती है। दिसंबर 2025 में उस रात दर्शन 11 बजे तक चले।